क्षमावाणी पर्व
बन्धुओं, हम सभी ने दशलक्षण (उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम सत्य, उत्तम शौच, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य, उत्तम ब्रह्मचर्य) पर्यूषण पर्व दिनांक 28 अगस्त 2006 से 6 सितम्बर 2006 तक भक्तिभावपूर्वक मनाया। आराधना और तप के जरिये कषायों को नष्ट कर आत्मशुद्धि की है। आत्मा निर्मल हुई और इसी के फलस्वरूप यह साहस जुटा पा रहे हैं कि क्षमा याचना करें।
“विगत में जाने-अनजाने में प्रमादवश हुई त्रुटियों को अपने निर्मल मन से क्षमा कर देवें।
क्षमा वीरस्य भूषणम्‘
क्षमा मांगना आसान होता है परन्तु कठिन है- ह्दय से क्षमा कर देना। |