आज (सन 2006) जैसवाल जैन पत्र के 87वे वर्ष का अंक निकल रहा है तदनुसार प्रथम अंक सन 1919 में निकला था। तब से आज तक लम्बी यात्रा महासभा ने तय की है। समय समय पर हमारी महासभा के पूर्व अध्यक्षों ने महासभा को सुचारू रूप से चलाने के सभी प्रयत्न किए एवं सफल भी रहे। डॉ. विमल कुमार जैन (दिल्ली), डॉ. राजकमल जैन (मथुरा), पारस कुमार जैन (आगरा), डॉ. धन्यकुमार जैन, (नोयडा) एवं डॉ. राजकमल जैन (मथुरा) आदि पूर्व अध्यक्षों ने हमारी महासभा के गरिमामयी पद के कर्तव्यों को बखूबी निभाया। आज
श्री मणीन्द्र जैन इस महत्वपूर्ण गरिमामयी पद को सुशोभित कर रहे हैं।
महासभा के तीन मुख्य उद्देष्य हैं - संगठन, समन्वय व सदभावना।
णमो अरिहंताणं
णमो सिद्धाणं
णमो आयरियाणं
णमो उवज्झायाणं
णमो लोएसव्वसाहूणं
एसो पंच णमोक्कारो
सवव् पावप्पणासणो
मंगलाणं च सव्वेसिं
पढमं हवइ मंगलम्
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